सोमवार, 13 अप्रैल 2009

शर्म कैसे आती है

मुझे अभी के अभी बता दो- शर्म कैसे आती है?
शादी करके जैसे दुल्हन ससुराल आती है
या जैसे कोई ट्रांसफर होकर नए दफ्तर में आता है
या जैसे नींद आती है यो जैसे हँसी या रोना आता है !
बताओ न !
बताते क्यों नहीं ?
मुझे भी देखना है कि शर्म कैसे आती है?
क्या वह हवाई जहाज पर उड़ कर आती है!
शर्म देखने कैसी है?
सोनल बुआ की तरह या मिनल भाभी की तरह या प्रियंका मौसी की तरह।
हाँ, वैसी ही होगी शर्म भी
कितनी बातूनी है न सोनल बुआ , पर प्रियंका मौसी अच्छी हैं ।
अच्छा मम्मी ,
शर्म का आना लोगों को क्यों अच्छा नहीं लगता !
मुझे तो कोई कुछ बताता ही नहीं ।
अच्छा मम्मी,
दादाजी और दादीमाँ उसदिन बात कर रहे थे कि अब किसी को शर्म नहीं आती।
क्यों नहीं आती है शर्म , मम्मी!
मैं लेके आऊंगा शर्म को
पर कोई मुझे बताओ तो सही कि शर्म आती कैसे है ?

4 टिप्‍पणियां:

अल्पना वर्मा ने कहा…

आप सच कहते हैं,
'दादाजी और दादीमाँ उस दिन बात कर रहे थे कि अब किसी को शर्म नहीं आती।'

नैतिकता की पढाई भी हार गयी है...आज के जमाने में... आधुनिकता के नाम पर सब ताक पर धर दिया है!समाज के किसी भी वर्ग को लेलिजीये ढेरों उदहारण मिल जायेंगे.

sandhyagupta ने कहा…

Bahut khub..

Babli ने कहा…

बहुत बढ़िया !!

ARUNA ने कहा…

क्या खूब कहा आपने! शर्म तो लगता है गयी तेल बेचने! लोग भूल ही गए उसके बारे में!