शुक्रवार, 10 अप्रैल 2009

बाबा मटुकनाथ की प्रेम-पार्टी

बुजुर्गों ने कहा है - कुकर्मी का नाम या सुकर्मी का नाम।
तो मित्रो,
डॉ मटुकनाथ ने जैसे-तैसे नाम तो अर्जित कर ही लिया है। कैसे?
भई, जब मैं और आप उस व्यक्ति को जानते हैं- चाहे जिन कारणों से- यही तो प्रसिद्धि है। बदनाम हुए तो क्या नाम न हुआ? हुआ, सौ बार हुआ।
नाम हुआ था प्रेम के कारण-यह भी सनद रहे।
किसी ने मुंह पर कालिख पोत दी - श्रीमानजी धीर-गंभीर स्थित-प्रज्ञ की तरह अविचलित रहे थे, याद आया। कुछ लोगों को इसमे सहिष्णुता दिखी होगी तो कुछ लोगों को अहिंसा। पर मुझ जैसे चंद नासमझों को उसकी लाचारी और बेबसी दिखी, बस नज़र-नज़र का फेर है और क्या!
तो सुना कि भाईसाहेब, एक प्रेम-आधारित राजनैतिक पार्टी का गठन किया है पटना में।
डॉ साहिब प्रेम पर बल देना चाहते हैं। दुसरे शब्दों में , प्रेम पर आधारित समाज का निर्माण करना चाहते है। जो भी अपनी बसी बसाई गृहस्थी को उजाड़ कर अपनी बेटी आदि की उम्र की स्त्रियों से प्रेम करना चाहते हों,( क्षमा करें, बात सिर्फ़ पुरुषों को ध्यान में रखकर हो रही है, इसी तरह महिलाऐं भी अपना स्थान निर्धारित कर ले सकती हैं ) यह प्रेम पार्टी उनकी सामाजिक निंदा से रक्षा करते हुए , सुरक्षा की पूरी व्यवस्था करेगी।
तय है कि हम आप में से बहुत सारे लोग इस कुंठा के मारे बेचारे होंगे तो अब देर किस बात की चुपचाप बाबा मटुकनाथ की प्रेम पार्टी को अपना गुप्त समर्थन भेजें।
मैं व्यक्तिगत रूपसे परिवारवादी हूँ - ऐसे किसी कृत्यों की जोरदार शब्दों में भर्त्सना करता हूँ और लानत भेजता हूँ कि ऐसे लोग किसी भी व्यवस्थामूलक समाज के शरीर पर फोड़ा है जो कभी कभी ज्यादा आम या मिठाई खाने से हो जाता है ।
ऐसे लोग टेपचू होते है सिर्फ़ निंदा अपमान से नष्ट नहीं होते है।
और हम लोगों को इनका तमाशा देखने में मजा आता है।
तो आइये , इस टेपचू व्यक्तित्व वाले मटुकनाथ की प्रेम पार्टी का तमाशा देखें कि कितने स्वच्छंदता के पक्षपाती इस महत-उद्देश्य में अपना अमूल्य योगदान देते हैं।

2 टिप्‍पणियां:

अल्पना वर्मा ने कहा…

'ऐसे लोग किसी भी व्यवस्थामूलक समाज के शरीर पर फोड़ा है जो कभी कभी ज्यादा आम या मिठाई खाने से हो जाता है ।
ऐसे लोग टेपचू होते है सिर्फ़ निंदा अपमान से नष्ट नहीं होते है।'

----------टेपचू लोग! वाह!यह भी नया शब्द मिला!
अच्छा तीखा व्यंग्य कसा है.इन टेपचू ' लोगों पर.

रवीन्द्र दास ने कहा…

alpna ji! tepchoo kahani hai uday prakash ki.achchhi kahani hai. vaise to uday ka sara sahitya hi behtar hai. meri samajh me samkalino me vinod kr shukla aur uday prakash do hi sampurn sahityakar hain.