बुधवार, 9 जुलाई 2008

किसी मान्य विद्वान् की बात नहीं, सिर्फ़ आपकी और मेरी

आप , आपके बौद्धिक सहयोगी और मैं मिलकर सोचेंगे कि
कविता क्या है ?
कविता क्यों है ?
आप कविता क्यों लिखते हैं ?
नहीं लिखते , तो कविता पढ़ते हुए कविता में क्या देखते हैं ? या देखना चाहते है ?
क्या किसी अटपटे और उलझे वाक्य-विन्यास को मन लिया जाय कि यह कविता ही है ?
किसी मन में कोई उलझन या दुःख है -उन्होंने लिख छोड़ा तो हम उसे कविता मान लें ?
अमूमन , लोग कविता में मुद्दे को तलाशा करते है - मिल गया तो वाह-वाह, वरना कविता कूड़ा , क्या यह सही है ?
ये प्रश्न नहीं , मुद्दे हैं जिन पर हम सोचेंगे
मुद्दे और भी हैं जो आपके, उनके, और मेरे मन में है .......
मैं आपके हस्तक्षेप की प्रतीक्षा में हूँ ......
धन्यवाद

1 टिप्पणी:

bahadur patel ने कहा…

achchha likh rahe hain.