बुधवार, 25 मार्च 2009

करम-जलों खुशियाँ मनाओ

अरे करमजलो ! घी के दिए जलाओ, खुशियाँ मनाओ , नाचो-गाओ, ढोल-ताशे बजाओ ।
क्यों?
अरे भुखमारो! सुना नहीं , रतन टाटा साहेब नैनो कर लेकर आए है हम गरीबों के लिए।
सारा टीवी चैनल , सारा अख़बार , सब को देखा नही कैसे उछल रहे थे जैसे उनकी बहिनियाँ की शादी हो। यही एक कर भारत की तकदीर बदल देगी।
याद है, मारुती कर भी जनता कर होकर आई थी।
हें .... क्या फालतू बात लेकर बैठ गए?
नैनो कोई कर थोड़े है !ई तो हम गरीब का सपना है, जो देखो कि सच हो गया ।
नैनो में नैनो छाए ......
अपना बकवास बंद करो, जिसको रोटी नहीं मिलती उसके थोड़े है
इ तो इस्कूटर , मोटरसाइकिल में जो डरा करे उनके लिए।
वैसे इ टीवी के रिपोटर सब काहे इतना उछल रहे थे? कुछ समझ में नहीं आया ।
अरे बुडबक! रुपैया न दिया होगा ,
ई लोग नया जमाना के लोग हैं , इनको पैसा-रुपैया दो तो ये लोग तो माँ-बहिन को गली भी ऐसे ही दे दें।

3 टिप्‍पणियां:

sandhyagupta ने कहा…

Sahi jagah par chot ki hai aapne.Badhai.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत सटीक व्यन्ग लिखा आपने. शुभकामनाएं.

रामराम.

अल्पना वर्मा ने कहा…

'इ तो इस्कूटर , मोटरसाइकिल में जो डरा करे उनके लिए। '


-बहुत करारा व्यंग्य किया है..