शनिवार, 14 अगस्त 2010

हम जन्म लें स्वतन्त्र ही, स्वतन्त्र ही मरें

शुभकामनाएँ ह्रदय की अतल गहराई से !
स्वतंत्रता यानि आज़ादी।
क्या हम सबको आज़ादी पसंद है ?
हमने कभी विचार करके देखा है कि हम कितने बंधन में हैं ?
जैसे ही हम सुख का सपना देखेंगे- हम बंधन को , परतंत्रता को निमंत्रण दे देंगे।
और हमने किया।
गांधीजी ने स्वावलंबन की शिक्षा दी, हमने आधुनिकता की दुहाई देकर उससे किनारा कर लिया।
मैं बाहर देखने को नहीं , अपने आपको और अपने अन्दर देखने का निवेदन करता हूँ । आपको वहीँ अपनी आज़ादी तडपती हुई और लथपथ सी तडपती हुई दिखाई देगी।
वो बाज़ार है जिसके आप स्वेच्छा से गुलाम हो गए हैं, सुविधा के लालच में ..........
ऐसा थोड़े ही है कि गुलामी सुख नहीं देती है, देती है जरूर लेकिन अपने इशारे नाचती भी।
खैर!
१५ अगस्त , स्वतंत्रता दिवस आप सबको बहुत बहुत मुबारक हो। नमस्ते।

2 टिप्‍पणियां:

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

स्वाधीनता दिवस की अनन्त शुभकामनाएं.

Akshita (Pakhi) ने कहा…

आपने तो बहुत अच्छा लिखा..बधाई.
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"पाखी की दुनिया' में 'मैंने भी नारियल का फल पेड़ से तोडा ...'