सोमवार, 1 जून 2009

माधोप्रसाद की छोटी सी दुनिया

अब आप लोगों के लिए माधोप्रसाद अपरिचित नही रहे। पढ़े-लिखे अच्छी नौकरी करने वाले और विचार से प्रगतिशील मनुष्य हैं । कुछ बातें , माधोप्रसाद के विषय में , स्पष्ट कर देना चाहता हूँ :
१) माधोप्रसाद सर्व-स्वीकृत मनुष्य हैं, यानि किसी को कोई शक-शुबहा नहीं है उनके आदमजाद होने पर।
२) माधोप्रसाद की एक पत्नी है ।
३) माधोप्रसाद का एक ससुर भी है, जो रिटायर्ड है। माधोप्रसाद के अनुसार , ससुरे के पास बहुत माल है। यह विश्वास माधोप्रसाद के लिए बेचैनी का सबब है।
४) माधोप्रसाद अपनी पत्नी को मुर्ख और खुबसूरत मानता है।
५) माधोप्रसाद का एक बाप भी है जो जीवित है ।
६) माधोप्रसाद के तीन और भाई हैं ।
७) जैसे माधोप्रसाद का बाप सचमुच माधोप्रसाद का बाप ही है, वैसे ही भाई भी इसके भाई ही हैं।
८) माधोप्रसाद अपने को बहुत होशियार समझता है ।
९) माधोप्रसाद अपनी होशियारी या चालाकी या कमीनापन या इस तरह का और कुछ भी .... सब तिकड़म -अपनी पत्नी, अपने ससुर, अपने बाप और अपने भाइयों पर ही आजमाता है ।
कहना न होगा , माधोप्रसाद अपने काम में पूरी तरह सफल है - तो भी माधोप्रसाद दिन-रात, सुबह-शाम, जब-तब अपने इन्हीं लोगों को उल्लू बना कर लूटने के सपने देखता है और योजनाएं बनाता है ।
यही माधोप्रसाद की छोटी सी , प्यारी सी दुनिया है। माधोप्रसाद अपनी उस दुनिया में खूब तरक्की कर रहा है। माधोप्रसाद को आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि उसके दोस्त मित्र उससे ईर्ष्या करते है ।
१०) माधोप्रसाद शर्म को कमजोरी मानता है , वह शर्म की दीवार को पार चुका है। बेशर्म होने को सफलता की कुंजी मानता है।

2 टिप्‍पणियां:

yuva ने कहा…

Yah climax par jaane se pahle hee katha ka pataakshep daily chalne waale serial kee tarah hai. Jigyaasa bani rahti hai. Par katha roj nahi aatee hai.

रवीन्द्र दास ने कहा…

dhairya rakhen, kahani aage avashy badhegi. aapki jigyasa hamari poonji bhi hai to byaj bhi. dhanyavad.